संदेश

आसव-अरिष्ट

अर्जुनारिष्ट : शरीर में वायु अधिक होने से हृदय की धड़कन बढ़ना, पसीना अधिक आना, मुँह सूखना, नींद कम आना, दिल घबराना, फेफड़े के रोग तथा हृदय रोगों में लाभकारी। अभ्रयारिष्ट : सभी प्रकार के बवासीर की प्रसिद्ध दवा है। कब्जियत, मंदाग्नि आदि उदर रोगों को नष्ट कर अग्नि को बढ़ता है। पीलिया, तिल्ली, उदर रोग, झांई, अर्बुद, ग्रहणी तथा ज्वरनाशक है। अमृतारिष्ट : सब तरह के बुखार में लाभकारी। विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व पित्त ज्वर में विशेष लाभ करता है। बालकों के यकृत बढ़ने पर लाभकारी। अरविन्दासव : बालकों को सूखा रोग, अतिसार, दूध न पचना आदि रोगों को दूर कर उन्हें हृष्ट-पुष्ट, बलवान बनाता है। पाचन क्रिया ठीक होकर रक्त, मांस व बल वृद्धि होती है। बुद्धि वर्द्धक व रक्त शुद्धि कारक है। अशोकारिष्ट : स्त्रियों के सब प्रकार के रोग, प्रदर, (लाल, पीला, सफेद पानी), मासिक धर्म के विकार, सिर पेडू व कमर वगैरह के दर्द, पित्त दाह (हाथ व पाँव के तलवों की जलन), प्रमेह, अरुचि, उदरशूल आदि इसके सेवन से नष्ट होते हैं। शरीर की शक्ति व मुख की कांति बढ़ती है। अश्वगंधारिष्ट : दिमागी ताकत बढ़ाने और शरीर को पुष्ट करने में विशेष...

*चिकनगुनिया के दर्द से राहत दिलाने वाला

चिकनगुनिया के दर्द से राहत दिलाने वाला स्वस्थ भारत की और छोटा सा कदम........👣👣* की कोशिश आपके घर में बीमारी के कारण कोई भी दुखी न हो और *प्रत्यके भाई ओर बहन के चहरे पे ख़ुशी के लिये करीब 950 ग्रुप के द्वारा 16000 लोगो तक यह टिप्स भेज कर आपकी बीमारी को जड़ सर खत्म करने की कोशिश कर रहे है* और आप से निवेदन है कि आप लोग कम से कम 5 ग्रुप मैं भेज दे सामग्री :- 50 ग्राम सरसों का तेल 50 ग्राम सफेद तिल का तेल 15 लौंग 1 टुकडा दालचीनी 2 टेबल स्पून अजवायन 1 टेबल स्पून मेथी दाना 1 छोटा टुकडा अदरक पिसा हुआ 1 टी स्पून हल्दी 2 बडे पीस कपूर 1 टेबल स्पून एलोवेरा जैल विधि :- कढाई मे दोनो तेल डाल कर तेज गैस पर गर्म करो फिर गैस को धीमी करके हल्दी और कपूर को छोड कर  सारी चीजो को डाल दो , जब तक सारी चीजे जल न जाए और उन का सत तेल मे ना आ जाऐ , करीब 20-25 मिन्ट लगेंगे इन्हें जलने मे जब ये भून जाएगें तब तेल का रंग गहरा हो जाएगा फिर गैस बंद कर दे और उसमे हल्दी ,कपूर मिला दे जब तक कपूर घुल ना जाए तब तक तेल को ठंडा होने दे फिर तेल को छान कर एक शीशी मे भर कर रखो , कैसा भी बुरा  दर्द हो ...

महिलाये क्यों पहनती है बिछिया ? वैज्ञानिक तर्क -

महिलाये क्यों पहनती है बिछिया ? हमारे देश में शादीशुदा महिलाये बिछिया पहनती है. वैज्ञानिक तर्क - पैर की दूसरी ऊँगली में चांदी का बिछिया पहना जाता है और उसकी नस का कनेक्शन बच्चेदानी से होता है| बिछिया पहनने से बच्चेदानी तक पहुचने वाला रक्त का प्रवाह सही बना रहता है इससे बच्चेदानी स्वस्थ बनी रहती है और मासिक धर्म नियमित रहता है |  चांदी पृथ्वी से ऊर्जा को ग्रहण करती है और उसका संचार महिला के शरीर में करती है |

सिर पर चोटी वैज्ञानिक तर्क-

सिर पर चोटी हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।

हाथ जोड़कर नमस्ते करना वैज्ञानिक तर्क-

हाथ जोड़कर नमस्ते करना जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।

गुप्त रोगों का स्थायी समाधान

गुप्त रोगों का स्थायी समाधान शीघ्रपतन, धात गिरना , सवपनदोष , नपुंसकता के स्थायी इलाज के लिए नुसखा सूरण :- 9 ग्राम तुलसी :- 9 ग्राम अशवगंधा :- 9 ग्राम सफेद मुसली :- 4.5 ग्राम गोखरू :- 1.8 ग्राम शतावरी :- 4.5 ग्राम कौंच बीज :- 9 ग्राम विदारीकंद :- 9 ग्राम नागौरी असगंध :- 1.8 ग्राम शुद्ध शिलाजीत :- 900  मिलीग्राम अकलकरा :- 1.8 ग्राम स्वर्ण भसम :- 1.8 मिलीग्राम जायफल :- 900 मिलीग्राम लौंग :- 900 मिलीग्राम सौंठ :- 1.8 ग्राम केसर :- 90 मिलीग्राम पीपर :- 900 मिलीग्राम जावित्री :- 900 मिलीग्राम इलायची :- 900 मिलीग्राम दालचीनी :- 900 मिलीग्राम तामलपत्र :- 900 मिलीग्राम नागकेशर :- 1.8 ग्राम वंशलोचन :- 7.2 ग्राम उपरोक्त सभी औषधियों को आपस मे मिला दे और हर रोज 430 मिलीग्राम रात को सोने से पहले दूध के साथ ले । नोट :- औषधि सेवन के दौरान खटाई का सेवन और कच्चे प्याज का सेवन बंद कर दे ।
मित्रो बहुत से लोग नशा छोडना चाहते है पर उनसे छुटता नहीं है !बार बार वो कहते है हमे मालूम है ये गुटका खाना अच्छा नहीं है लेकिन तलब उठ जाती है तो क्या करे ??? बार बार लगता है ये बीड़ी सिगरेट पीना अच्छा नहीं है लेकिन तलब उठ जाती है तो क्या करे !?? बार बार महसूस होता है यह शाराब पीना अच्छा नहीं है लेकिन तलब हो जाती है तो क्या करे ! ???? तो आपको बीड़ी सिगरेट की तलब न आए गुटका खाने के तलब न लगे ! शारब पीने की तलब न लगे ! इसके लिए बहुत अच्छे दो उपाय है जो आप बहुत आसानी से कर सकते है ! पहला ये की जिनको बार बार तलब लगती है जो अपनी तलब पर कंट्रोल नहीं कर पाते नियंत्रण नहीं कर पाते इसका मतलब उनका मन कमजोर है ! तो पहले मन को मजबूत बनाओ! मन को मजबूत बनाने का सबसे आसान उपाय है पहले थोड़ी देर आराम से बैठ जाओ ! आलती पालती मर कर बैठ जाओ ! जिसको सुख आसन कहते हैं ! और फिर अपनी आखे बंद कर लो फिर अपनी दायनी(right side) नाक बंद कर लो और खाली बायी(left side) नाक से सांस भरो और छोड़ो ! फिर सांस भरो और छोड़ो फिर सांस भरो और छोड़ो ! बायीं नाक मे चंद्र नाड़ी होती है और दाई नाक मे सूर्य नाड़ी ! चंद्र ना...