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पेट के लिए बढिया औषधि है हरड़, जानिए कुछ और घरेलू फायदे ।

पेट के लिए बढिया औषधि है हरड़, जानिए कुछ और घरेलू फायदे ।============================= हरड़ को आयुर्वेद मे गुणकारी औषधि माना गया है। आयुर्वेद की चरक संहिता मे जिस प्रथम औषधि के बारे में बताया गया है वह हरड़, हर्रे या हरीतकी है। हरड़ की उपयोगिता के बारे मे शास्त्रों मे कहा गया है कि जिसके घर मे माता नहीं है, उसकी माता हरीतकी है। माता फिर भी कभी कुपित (गुस्सा) हो सकती है लेकिन हरड़ पेट में जाने पर कोई अहित नहीं करती बल्कि हमेशा फायदा ही करती है। घरेलू रूप में छोटी हरड़ का ही अधिकतर उपयोग किया जाता है। हरीतकी संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद है विशेष रूप से कब्ज, बवासीर, पेट के कीड़ों को दूर करने, नेत्र ज्योति व भूख बढ़ाने, पाचन तथा अलग-अलग मौसम में होने वाले रोगों में भी ये प्रभावी होती है। प्रमुख प्रयोग 1. बवासीर और कब्ज के लिए दो ग्राम हरड़ के चूर्ण में थोड़ा गुड़ मिलाकर गोली बना लें। छाछ में भुना जीरा मिलाकर ताजा छाछ के साथ सुबह-शाम खाने के बाद इसे लेने से बवासीर के मस्सों का दर्द और सूजन में आराम मिलता है। 2. 2-3 हरड़ कच्ची ही...

जीरे में कई तरह के गुण छुपे हुए हैं जिनसे आपकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं।

जीरे में कई तरह के गुण छुपे हुए हैं जिनसे आपकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जीरा काला, सफेद और मटमैले रंग में उपलब्ध होता है। ============================= जीरे के स्वास्थ्य संबंधी अनुपम गुण इसे न केवल भारतीय खाने का अहम हिस्सा बनाते हैं बल्कि पुराने समय में यह रोमन, ग्रीक और मिस्र संस्कृति का भी खास हिस्सा था। इतना खास कि यह करंसी currency) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जीरा शरीर के सभी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं। 1......... हमारे शरीर में विभिन्न कारणों से गंदगी (toxic elements) आ जाते हैं जिन्हें शरीर पसीने और फुंसियों के रूप में बाहर निकालता है। जीरे का नियमित इस्तेमाल शरीर की शोधन करने की प्रक्रिया को तेज करता है और गंदगी मुंहासों और फुंसियों के तौर पर बाहर नहीं आती। आपकी त्वचा साफ और सुंदर बनी रहती है। 2.......... जीरे में विटामिन E भरपूर मात्रा में होता है जिससे यह त्वचा को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर होता है। इसमें प्राकृतिक तेल होने के साथ साथ एंटी फंगल गुण होते हैं जिनसे त्वचा ...

लो ब्लड प्रेशर के लिए घरेलू नुस्खे

1.= = = = =-= 50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। यदि देशी चने न मिल पाएं तो सिर्फ किशमिश ही लें। इस विधि से कुछ ही सप्ताह में ब्लेड प्रेशर सामान्य हो सकता है। 2.= = = = =-= रात को बादाम की 3-4 गिरी पानी में भिगों दें और सुबह उनका छिलका उतारकर कर 15 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर बादाम-गिरी को खाने से लो ब्लड प्रेशर नष्ट होता है। प्रतिदिन आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन लो ब्लेड प्रेशर में बहुत उपयोगी होता है। 3.= = = = =-= आंवले के 2 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन प्रातःकाल सेवन करने से लो ब्लड प्रेशर दूर करने में मदद मिलती है। 4.= = = = =-= लो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाये रखने में चुकंदर रस काफी कारगर होता है। रोजाना यह जूस सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे। जटामानसी, कपूर और दालचीनी को समान मात्रा में लेकर मिश्रण बना लेँ और तीन-तीन ग्राम की मात्रा मेँ सुबह-शाम गर्म पानी से सेवन करें। कुछ ही...

असाध्य रोगों को भी जड़ से खत्म करने में सक्षम तुलसी

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नही होता। अगर ज्योतिष की माने तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़ पौधों का कारक ग्रह माना जाता है। बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा उत्तरोत्तर बढ़ता रहता है। बुध के प्रभाव से पौधे में फल फूल लगने लगते हैं।प्रतिद...

चश्में से आजादी के लिए कुछ साधारण घरेलू नुस्खे

कम उम्र में चश्मा लग जाना आजकल एक कॉमन प्रॉब्लम है। खानपान में अनियमितता भोजन में पोषक तत्वों की कमी और अनुवांशिक कारण आदि से यह समस्या होती है। इस समस्या से जूझ रहे लोग इसे मजबूरी मानकर हमेशा के लिए अपना लेते हैं । लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर किसी कारण से एक बार चश्मा लग जाए तो वह उतर नहीं सकता। ==========अनुवांशिक कारण को छोड़कर अन्य कारणों से लगा चश्मा सही देखभाल व खानपान का ध्यान रखने के साथ ही देसी नुस्खे अपनाकर उतारा जा सकता है।आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खे जो आंखों की समस्या में रामबाण की तरह काम करते हैं ===========पैर के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करके सोएं। सुबह के समय नंगे पैर हरी घास पर चलें व नियमित रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें, आंखों की कमजोरी दूर हो जाएगी। ========= एक चने बराबर फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और रोजाना रात को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पांच बूंद आंखों में डालें। साथ ही, पैर के तलवों पर घी की मालिश करें। इससे चश्में के नंबर कम हो जाते हैं। ====== ग्रीन टी का सेवन भी आंखों के लिए अच्छा होता है। एक रिसर्च के अनुसार...

नाभि भ्रंश

========नाभि भ्रंश============== यह आधुनिक चिकित्सकों के अनुसार कोई रोग नहीं है किन्तु यह सर्वज्ञात है कि रोग न होते हुए भी ऐसी पीड़ा है जिसे भुक्तभोगी ही जानता है. इसे नाभि टलना, नाभिच्युति, धरण डिगना, घुण्डी सरकना आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है============?=========== गर्भावस्था के दौरान अम्बलाइकल कॉर्ड द्वारा माँ से बच्चे को पोषण मिलता है. जन्म के पश्चात यह नाल काट दी जाती है. आधुनिक शास्त्र में इसके पश्चात इसका कोई महत्व नहीं होता । यौगिक आचार्यों के अनुसार नाभि शरीर का गुरूत्वीय केन्द्र है. हाथ से दबा कर महसूस करने पर नाभिस्थल पर घड़ी के समान धड़कन सुनाई देती है । =========नाभि टलना=========== नाभि के स्वस्थान से किंचित मात्र भी हटने से सामान्य स्वस्थावस्था प्रभावित हो जाती है. नाभि, उदरावयव, औदर्य पेशी (Rectus Abdominus), की स्वस्थिति (alignment) में गड़बड़ होने को नाभिभ्रंश कहा जा सकता है. आयुर्वेदानुसार द्वादश प्राण स्थानों में से नाभि एक है. नाभि टलने में नाभि, नाभिस्थ तंत्रिका, उदर पेशियाँ, कनेक्टिव टिश्यू व आयुर्वेदोक्त प्राण प्रभावित हो सकते हैं. हांलाकि नाभि टलने का को...

खुनी बवासीर का एक दिन में इलाज।

खुनी बवासीर का एक दिन में इलाज। ============================= अगर आप बवासीर से परेशान हैं चाहे वो खुनी हो चाहे बादी, तो ये प्रयोग आपके लिए रामबाण से कम नहीं हैं। इस प्रयोग से पुरानी से पुरानी बवासीर 1 से 3 दिन में सही हो जाएगी। इस इलाज से एक दिन में ही रक्तस्राव बंद हो जाता है। बड़ा सस्ता व सरल उपाय है। एक बार इसको ज़रूर अपनाये। आइये जाने ये प्रयोग। ========नारियल की जटा से करे खुनी बवासीर का एक दिन में इलाज।======= ===== नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।=========================== ======== यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है। महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है। हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घू...