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बारिश के ये साधारण मौसमी फल इन रोगों की छुट्टी कर देते हैं.....

बारिश का मौसम आ गया है। हमारे देश के कई हिस्से बरसात से तरबतर हैं। बरसात में रोगकारकों की ज्यादा उपस्थिति हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ज्यादा तेजी से आक्रमण करती है। संक्रामक रोगों के होने का भय अक्सर बना रहता है। ऐसे में, पौष्टिक भोजन और स्वास्थवर्धक गुणों से भरपूर मौसमी फलों से हम कई तरह के रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं और इस मौसम का भरपूर आनंद ले सकते हैं। चलिए, आज जानते हैं बारिश में आने वाले फलों के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में..... 1. आडू माना जाता है कि इसके सेवन से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इस फल का रस कई तरह के सूक्ष्म जीवों के संक्रमण से बचाव करता है। आडू के सेवन से कब्जियत और अपच की समस्या का निदान हो जाता है। 2. जामुन जामुन में लौह और फॉस्फोरस जैसे तत्व प्रचुरता से पाए जाते हैं। इसमें कोलीन और फोलिक एसिड भी भरपूर मात्रा में होता है। पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि जामुन के सेवन से पेट की सफाई हो जाती है। यह मुंह के स्वाद को भी ठीक कर देता है। जामुन के ताजे फल की करीब 100 ग्राम मात्रा को 300 मिली पानी के साथ रगड़ लें। इसके छिलके और रस निकाल ...

ऐसे करें पेट के रोगों से बचाव:

ऐसे करें पेट के रोगों से बचाव: गरमी के मौसम में पेट से संबंधित रोगों के मामले कुछ ज्यादा ही बढ़ जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर में पित्त दोष की अधिकता होती है। पित्त का संबंध हमारे पाचन तंत्र से होता है। इसलिए पित्त की अधिकता से कई प्रकार के पेट के रोग जैसे- पेट दर्द, अम्लपित्त (एसीडिटी), आंतों में सूजन, अतिसार (दस्त), गैस और अफारा हो जाते हैं। दूषित जल का दुष्प्रभाव गरमी के मौसम में आमतौर पर दूषित जल व प्रदूषित भोजन के सेवन से पेट दर्द, हैजा, टाइफाइड, आंतों में इंफेक्शन आदि रोग हो जाते हैं। पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) के कारण भी शरीर दर्द, बुखार आदि रोग हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त लू लगना (सन स्ट्रोक) आदि स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं। गरम तासीर के पदार्र्थों से परहेज गरमी के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए बहुत आवश्यक है शरीर में ठंडक बनाए रखना। चाय, काफी, मिर्च, गरम-मसाले, मांस (नॉन वेज), शराब, तंबाकू, खट्टे और गरम तासीर वाले भोजन का सेवन वर्जित है। दिन भर में दो से तीन लीटर पानी पिएं। नारियल पानी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, आम का पना, सत्तू, ठंडे शर्बत (खस, गुलाब...

गैस, एसिडिटी, अपच, कब्ज दूर करती हैं पुदीने की चाय:

गैस, एसिडिटी, अपच, कब्ज दूर करती हैं पुदीने की चाय: ऑयली और स्पाइसी खाना खाने में तो बहुत ही स्वादिष्ट लगता है, लेकिन गर्मियों में इसका सेवन सेहत पर बुरा असर डालता है। इसलिए गर्मियों में हल्का खाना और खूब पानी पीना फायदेमंद कहा गया है। लिक्विड डाइट को वैसे भी शरीर के लिए बहुत ही जरूरी माना गया है। पुदीने की चाय: पुदीना एसिडिटी की समस्या को दूर करने में कारगर माना गया है। पुदीने की तासीर ठंडी होती है। यह खराब भोजन के कारण होने वाले पेट दर्द, मरोड़ और गैस से छुटकारा दिलाता है। इसमें मौजूद मेन्थॉल सांसों को रिफ्रेश करने के साथ ही अनेक प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है। खाने के बाद एक कप पिपरमिंट टी पीने से पाचन सही रहता है। इसे बनाने के लिए पानी गर्म करके उसमें पिपरमिंट वाटर बैग डालें और 10-15 मिनट के लिए इसे ढंक कर छोड़ दें। 15 मिनट बाद इसमें से टी बैग निकालकर इसे पी लें। इससे पाचन दुरुस्त रहता है। natural health care products arjunarishta syrup ayurvedic liver tonic products ashwagandharishta uses www.herbalhealthcare.com alkaliser syrup ayurvedic healthcare

ये दो चीजें छोड़ेंगे तो हेल्दी हो जाएंगे स्पर्म काउंट:

ये दो चीजें छोड़ेंगे तो हेल्दी हो जाएंगे स्पर्म काउंट: कैफीन यूं तो कई रिसर्च कह चुकी हैं कि कैफीन का स्पर्म काउंट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ना तो शुक्राणुओं की संख्या पर ना ही उनके आकार पर। लेकिन हेल्‍थिस्टा के मुताबिक, अमेरिका की एक रिसर्च में पाया गया है कि बहुत ज्यादा कैफीन पीने से आईवीएफ तकनीक के द्वाा प्रेगनेंसी में दिक्कतें आती हैं। यानी आईवीएफ तकनीक से बच्चा पाने वालों को इसमें दिक्कतें आती हैं। इस स्थिति से बचने के लिए दोनों ही पार्टनर्स को रोजाना एक कप कॉफी से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। डाइट ड्रिंक: रिसर्च के मुताबिक, डाइट ड्रिंक्स में स्वीटर के लिए इस्तेमाल होने वाला एस्पार्टैम का ताल्लुक कम होते शुक्राणुओं की संख्या से है। साथ ही इसस स्पर्म डीएनए भी खराब होता है। आपको फुल फैट और हाई शुगर वाले डाइट ड्रिंक को पीने स बचना चाहिए। रिसर्च में ये भी पाया गया है कि जो पुरुष बहुत ज्यादा मात्रा में सॉफ्ट ड्रिंक्स पीते हैं उनके स्पर्म काउंट घट जाते हैं।

पथरी के रामबाण घरेलू उपाय

पथरी के रामबाण घरेलू उपाय किडनी में स्‍टोन की समस्‍या आजकल आम हो चली है। इसकी बड़ी वजह खान-पान की गलत आदतें होती हैं। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो हमारे मूत्र में होते हैं) वे एक दूसरे के संपर्क में आते है या अगर किसी कारण से पेशाब गाढा हो जाता है तो किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती हैं जिन्हे गुर्दे की पथरी के रूप में जाना जाता है। गुर्दे की पथरी अलग अलग आकार की हो सकती है| कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत हीं छोटे आकार के होते हैं तो कुछ बहुत हीं बड़े। आमतौर पर छोटे मोटे पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाया करते हैं लेकिन जो पथरी आकार में बड़े होते हैं वे बाहर नहीं निकल पाते एवं मूत्र के बाहर निकलने में बहुत ही बाधा डालते हैं उससे बहुत हीं ज्यादा पीड़ा उत्पन्न होती है। पथरी का दर्द कभी-कभी बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। इसमें पेशाब करने में बहुत दिक्कत होती है और कई बार पेशाब रूक जाता है। पथरी होने की कोई उम्र नहीं होती है, यह किसी भी उम्र में हो सकती है।यहाँ पर हम आपको पथरी के कुछ आसान घरेलू नुस्खे के बारे में जानकारी देते हैं। *नारियल का पानी पीने...

अलसी खाएं सेक्स संबन्धी रोग भगाएं -

अलसी खाएं सेक्स संबन्धी रोग भगाएं - --------------------------------------------- होम्योपैथीक चिकित्सक आपकी सारी सेक्स सम्बंधी समस्याएं अलसी खिला कर ही दुरुस्त कर देगा क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की भी महान औषधि है। - सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है। - सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे। - अलसी आपकी देह को ऊर्जावान, बलवान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी। मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा। - अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभा...

पेड़ नहीं चमत्कार है 'सहजन'

पेड़ नहीं चमत्कार है 'सहजन' कल्पना करिए। एक ऐसा पेड़ जिसकी पत्तियों एवं फलियों में 300 से अधिक रोगों की रोकथाम के गुण, 92 विटामिन्स, 46 एंटी आक्सीडेंट, 36 दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हों, तो इसे पेड़ की जगह चमत्कार ही मानेंगे न। आपके इर्द-गिर्द यूं ही उगने वाले 'सहजन' में यह सभी गुण मिलते हैं। इसकी खूबियां यहीं खत्म नहीं होतीं। चारे के रूप में इसकी हरी या सूखी पत्तियों के प्रयोग से पशुओं के दूध में डेढ़ गुने से अधिक और वजन में एक तिहाई से अधिक की वृद्धि की रिपोर्ट है। यही नहीं इसकी पत्तियों के रस को पानी के घोल में मिलाकर फसल पर छिड़कने से उपज में सवाया से अधिक की वृद्धि होती है। कुपोषण, एनीमिया (खून की कमी) के खिलाफ जंग में सर्वसुलभ और हर जगह पैदा होने वाला सहजन उपेक्षित है। राष्ट्रीय बागवानी शोध एवं विकास संस्थान (एनएचआरडीएफ) के उप निदेशक डा.रजनीश मिश्र के मुताबिक करीब पांच हजार साल पहले आयुर्वेद ने सहजन की जिन खूबियों को पहचाना था, आधुनिक विज्ञान में वे साबित हो चुकी हैं। दुर्भाग्य से जिनको (आम आदमी) इसके गुणों को जानना चाहिए वही इससे अनजान हैं। डा.मि...